लखनऊ/उत्तर प्रदेश: राज्य में सड़क परिवहन पेशे से जुड़े कई ट्रक ऑपरेटरों और फॉरवर्डरों ने प्रशासन के खिलाफ संगठित शिकायत दर्ज कराई है जिसमें वे आरोप लगा रहे हैं कि कुछ थानों के पुलिस कर्मी और बाहरी दलाल ट्रक चालकों से “रेट” तय कर पैसों की वसूली करते थे ताकि वाहन बिना चेकिंग और बाधा के चल सकें।
शिकायतों में कहा गया है कि हर थाने का अलग-लग रेट तय था और जिसे रेट देने से इनकमिंग चालान या जांच से बचा लिया जाता था। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिन थानों की बात कही जा रही है, वहां से गुजरने पर कुछ चालकों ने मोबाइल पर नोट करते हुए और सीसीटीवी कैमरों पर पैसों का लेन‑देन रिकॉर्ड भी कर लिया — कुल मिलाकर पांच थानों के कैमरा फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड को संज्ञान में लाया गया है।
आरोपों के मुताबिक़, ड्राइवरों और मालिकों को अक्सर रात के समय या हाईवे किनारे बुलाकर रुपये लिए जाते थे और न देने पर वाहनों को रोका जाता था। ट्रक मालिकों ने स्थानीय परिवहन संघ और राज्य परिवहन विभाग को भी आवेदन देकर मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि अभी यह शिकायत दर्ज हुई है और प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि अगर कैमरा फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड सार्वजनिक आरोपों का समर्थन करते हैं तो संलिप्त कर्मियों के खिलाफ आंतरिक जांच व कार्रवाई की जाएगी। वहीं कुछ थाने के वरिष्ठ अधिकारी इस आरोप को खारिज करते हुए कह रहे हैं कि केवल कुछ समन्वयहीन घटनाएं हुई होंगी और जांच के बाद सच सामने आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आरोप सत्य पाए गए तो यह सिस्टमिक भ्रष्टाचार का संकेत है और सड़क परिवहन व लॉ एंड ऑर्डर दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने ट्रक ऑपरेटरों से संयम का आह्वान करते हुए आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाएगी।
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