पहले मिलीभगत से बनवाई गई थीं दुकानें,
अब प्रशासन के साथ कोर्ट ने तोड़ा सपना — व्यापारी परेशान
मेरठ। शहर के व्यापारी अब आवास विकास प्राधिकरण (UDC) के खिलाफ अपनी नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले अधिकारियों की मिलीभगत से दुकानें बनवाई गई थीं, जो उनके लिए रोजगार और आजीविका का स्रोत थीं। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये दुकानें ध्वस्त कर दी गई हैं, जिससे परिवारों पर गंभीर असर पड़ा है।
व्यापारी राजेश गुप्ता ने बताया, “हमने मेहनत से यह दुकानें बनाई थी। पहले अधिकारियों ने इजाजत दी, और अब अचानक सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया। हमारे परिवार का रोजगार उजाड़ दिया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों के सदस्य इसी व्यवसाय पर निर्भर थे और अब उन्हें नए रोजगार की तलाश करनी पड़ेगी।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया था। इस दौरान कुछ दुकानदारों ने कहा कि उन्हें पूर्व में नोटिस या वैकल्पिक स्थान नहीं दिया गया, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
विपक्षी दल और व्यापार संघ ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि “यह कदम छोटे व्यवसायियों के हितों के खिलाफ है। प्रशासन और न्यायपालिका को संतुलन बनाकर निर्णय लेना चाहिए था।”
व्यापारी अब न्यायिक राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पुनर्वास और मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी आजीविका बच सके।
इस मामले ने शहर में व्यापारियों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है, और आने वाले दिनों में कोर्ट और प्रशासन के बीच संभावित हल निकालने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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