शिक्षा विभाग में हड़कंप
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जिले के एक कंपोजिट विद्यालय में पंजीकृत 107 बच्चों में से एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। निरीक्षण के समय विद्यालय में सिर्फ कुछ शिक्षक मौजूद थे, जो कक्षाओं में पढ़ाने की बजाय पंचायत में चर्चा करते दिखाई दिए।
यह खुलासा उस वक्त हुआ जब CDPO (Child Development Project Officer) ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। स्कूल परिसर में दाखिल होते ही अधिकारी यह देखकर हैरान रह गए कि सभी कक्षाएँ खाली थीं और कहीं भी बच्चों की आवाज तक नहीं थी।
जांच में सामने आया कि विद्यालय में बच्चों का नामांकन तो 107 है, लेकिन न तो मिड-डे मील चल रहा था, न ही उपस्थिति रजिस्टर सही तरीके से भरा गया था। कई शिक्षकों को यह तक नहीं पता था कि कितने बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं।
CDPO ने तत्काल ही बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) को रिपोर्ट भेजते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि “शिक्षा के अधिकार कानून का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ कागज़ों पर दिखाया जा रहा है, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे ब्लॉक के कई विद्यालयों में उपस्थिति बेहद कम रहती है। अधिकारी अब जिले के अन्य स्कूलों में भी औचक निरीक्षण की तैयारी कर रहे हैं।
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