सपा नेताओं के सनातन विरोधी बयानों पर डॉ. राजेश्वर सिंह की दो-टूक

दीयों से डरने वालों की राजनीति अंधकारमय – डॉ. राजेश्वर सिंह

दीयों में खतरा देखने वाले क़त्लगाहों की आग में भी करुणा नहीं खोज पाते – डॉ. राजेश्वर सिंह

अंग्रेज़ ताक़त से नहीं, हमारी फूट से जीते थे – आज वही काम कांग्रेस और सपा कर रही : डॉ. राजेश्वर सिंह

जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर बांटना – देश को फिर से गुलाम बनाने की यही विपक्ष की राजनीति है

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बृहस्पतिवार को जारी दो प्रभावशाली सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से एक ओर समाजवादी पार्टी द्वारा भारतीय परंपराओं पर किए जा रहे असंवेदनशील राजनीतिक वक्तव्यों पर करारा प्रहार किया, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों द्वारा देश को विभाजित करने की नीति पर गंभीर टिप्पणी की।

दीयों से डरने वालों की राजनीति अंधकारमय –
दीपोत्सव के अवसर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव जी और आजम खान के बयानों को भारतीय संस्कृति पर सीधा प्रहार बताते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह जी ने कहा, “दीपक केवल मिट्टी का पात्र नहीं, भारत की आत्मा का प्रतीक है। वह ज्ञान का प्रकाश, शुभ कर्मों की प्रेरणा और धर्म की स्थिरता है। जो लोग दीपोत्सव से विचलित होते हैं, वे वास्तव में अपने भीतर के अंधकार से डरते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह वही मानसिकता है जो दीयों में खतरा देखती है, पर क़त्लगाहों की आग में करुणा नहीं खोज पाती। इतिहास साक्षी है – दीया जलाने वालों ने कभी किसी का अहित नहीं किया, जो दीप का विरोध करते हैं, वे दरअसल भारत की आत्मा को बुझाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत हर युग में आलोकित रहा है, क्योंकि यहाँ दीप, धर्म और राष्ट्र एक ही प्रकाश हैं।

‘आधुनिक मीर जाफ़र’ – भारत को तोड़ने की राजनीति:

अपने दूसरे संदेश में डॉ. राजेश्वर सिंह जी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि, “अंग्रेज़ भारत में अपनी ताक़त से नहीं, हमारी फूट से जीते थे। आज वही काम कांग्रेस और समाजवादी पार्टी कर रही हैं – जाति बनाम जाति, धर्म बनाम धर्म, उत्तर बनाम दक्षिण, बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक।”

उन्होंने चेताया कि ये ‘आधुनिक मीर जाफ़र’ भारत को अंदर से कमजोर करने की साज़िश कर रहे हैं। जिस प्रकार अंग्रेज़ों ने भारतीयों को भारतीयों के खिलाफ इस्तेमाल किया,
वैसे ही आज ये दल तुष्टिकरण और जातिवाद की राजनीति से जनता को विभाजित कर रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस–सपा पर विदेशी नैरेटिव अपनाने, राम मंदिर और हिन्दू परंपराओं के विरोध, और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ‘राष्ट्रीय चेतना को तोड़ने की सुनियोजित साज़िश’ है। भारत ने 200 वर्ष संघर्ष कर विदेशियों को बाहर निकाला है, अब समय है कि हम उन विचारधाराओं को भी समाप्त करें जो भारत की एकता और संस्कृति को खंडित करने का प्रयास करती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *